आज की कहानी

आज चारो तरफ सन्नाटा पसरा है।यह बात जंगल में तेजी से फैल रही थी। सोनूहिरण ने यह बात अपनी बेटी रानी से कही । क्यो मा तुमने कभी शहर देखा है?रानीने पूछा।माँ बोली पहले अपना घर था वहां पर। रानी ने उत्साह से पूछा सच माँअब कैसा है वहां पर।?सिवाय शोर चे- पे ,चे -पे आवाज ,दोडती हुई गाडियाँ, धूल, धुआं, कीचड़, कचरा,पन्नियोका ढेर, लडाई-झगडे

आदमियों की अफरा तफरी,बडी बडी बिल्डिंग उसमें कैद बच्चे। एक बार गयी तो बीमार पड गयी । जंगल की हरियाली, हवा, भोजन,आपसी सौहार्द वहां नहीं। अब कभी नहीं जाऊँगी शहर।तब रानी ने कहा माँ मुझे देखना है शहर और अपना पुराना घर भी । यह कहकर रानी खेलने चली गई। रानी ने दोस्तों से कहा मुझे शहर देखना है । वहां बैठी लोमड़ी मोसी बोली चली जा आजकल वहां बडी शांति है ।नीलगाय ताई को भी ले जाना।रानी ने माँ से जिद की। साथ मे लोमड़ी मोसी , नन्हे हिरण, ताई नील गाय शहर घूमने निकल पडे। सारी सडके सूनी ,कर्फ्यू सा आलम ,शांति शांति। अरे यहाँ का माहौल तो तो माँ के बताये से बिलकुल अलग है ऐसा क्यों? आदमी कहॉहै ।तभी एक व्यक्तिदिखा,अरे इसने मुँह पर क्या लगा रखा है जंगलमे ऐसा कभी नही देखा । बार बार हाथ मे क्या लगा रहाहै।रानी ने माँ से पूछा? अरे बेटा ये बीमारी से बचने के लिए कर रहा है। तभी एक नन्हा हिरण नेपूछा मोसी हमको तो कुछ नहीं होगा ? लोमड़ी मोसी ने कहा नहीं यह बीमारी हमे नहीं होगी,हम तो जानवर है, रे यह तो आदमी की बनाईं बीमारी है।आदमी आदमी से मिलता-जुलता है तो बीमार हो जायेगा।पर मा तू तो कह रही थी आदमी आदमी की तरफ देखताभी नहीं। अरे बेटा सब अपने-अपने मतलब से मिलते-जुलते है ।एक बिल्डिंग केपास सोनू हिरण रुक गई ऑखों मे आंसू आ गये ।रानी समझ गई यह ही हमारा पुराना घर है। तभी एक बिल्डिंग की खिड़की से बच्चे चिल्लाने लगे काऊ के छोटे-छोटे बच्चे साथ मे बफेलो भी है ।यह सुन सभी नन्हे हिरण, नीलगाय, लोमड़ी हंस पडी। तभी किसी ने कहा डियर डियर। मा यह डियर क्यों कह रहें है? अरे अगेरजी की किताब मे देखा है यह नाम।माँ सबबबच्चे कैद है कितना गलतहैं ?लोमड़ी मोसी बोली रे अभी तो बीमारी के कारण नही खेल पा रहे वैसे भी इन्हें खेलने जगह नही है सो यह बस मशीनों के खेल बैठे बैठे खेलतेहैं ।रानी सोच रही थी हम तो आज भी आजाद है खेल सकतेहै आदमियों ने हमारी जगह छिनी, भोजन छिना,हमे मारकर खा भी लिया ,हमे हमेशा नीचा समझा ।शायद यही सजा है इनकी यह तो होना ही था पर बच्चे उनका तोकोई कसूर नही पर सजा तो वो भीकाट रहे हैं यह सोचकर उसका मन भर आया।फिर वो सोचकर बोली माँ अब घर चल कही हमारा नया घर भी न छिन जाये मै कैद नही होना चाहती। सभी दोडते हुए जंगल की तरफनिकल पडे।

-डा सुचिता श्रीवास्तव

2 thoughts on “आज की कहानी

  1. Perfect. It clearly describes the situation and that too in a comical sense. A comical satire on the humans.

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  2. धन्यवाद आज भारत एवं विश्व मे कई जगह जानवरों को बस्तियों मे घूमते-फिरते देखा गया इसी सेप्रभावित यह कहानी है

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